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लोग , कविता संग्रह, स्वरचित , ममता चौहान

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लोग लोगों को नाराजगी है लोगों से उन्हें तकलीफ है अपनों से जो अपना नहीं, उसे अपना मानते हैं लोग जो अपना है, उसे बिच रास्ते में अक्सर छोड़ जाते हैं लोग गलती किसकी है, यही साबित करने के लिए अक्सर एक-दूसरे से लड़ जाते हैं लोग अपना सहुर ना देख के दुसरों पर लांछन लगाते हैं लोग अपने को राम बता के औरों को रावन बताते हैं लोग अपनी गलती छुपा के दुसरों को ग़लत ठहराते हैं लोग लोगों का क्या लेना है आज आपके तारीफों के पुल बांधेंगे तो कल उसी को धुल में मिलाएंगे लोग आप के मुंह पर बाह-बाही कर  पिठ के पिछे छुरा घोंपते है लोग तकलीफ मे आप को देखकर  हमेशा मुस्कुराएंगे लोग आपकी भलाई का बोल कर नुक्सान कराएंगे लोग आपको गलत राह दिखा के हमेशा ठहाके लगाएंगे लोग अब आप ही सोचिए की, कैसे कैसे होते हैं लोग।               ----------- ममता चौहान

जिंदगी का पेहलू

            जिंदगी का पेहलू चलने का नाम जिंदगी है। जीवन नदी के समान बहता रहता है। हां, लेकिन समुद्र में जाकर मिल जरूर जाता है। वैसे ही, ये सुहानी सी जिंदगी हमेशा नहीं रहती है। कभी उतार-चढ़ाव आ जाते हैं। इन पड़ावों को धैर्य से पार करते चलो। मेरी और आप की जिंदगी अलग है। लेकिन साथ एक-दूसरे का हमेशा देते चलों। माना मुश्किल बहुत है। लेकिन होंसला हमेशा बड़ा रखो अगर बड़े सपने देखे हैं। तो उन्हें पुरा करने का साहस भी तो रखों! कामयाबी मिले ना मिले प्रयत्न तुम सदा करो अपने लिए ना सही लेकिन सब के लिए तुम दुआ करों। किसी की दुआ रंग लायेगी जब हम मुकाम तक पहुंचोगे तब भी तुम, किसी का साथ मत छोड़ना क्योंकि इंसानियत ही इंसान को काम आएगी। -------- ममता चौहान