लोग , कविता संग्रह, स्वरचित , ममता चौहान






लोग

लोगों को नाराजगी है लोगों से
उन्हें तकलीफ है अपनों से
जो अपना नहीं,
उसे अपना मानते हैं लोग
जो अपना है,
उसे बिच रास्ते में अक्सर छोड़ जाते हैं लोग
गलती किसकी है,
यही साबित करने के लिए
अक्सर एक-दूसरे से लड़ जाते हैं लोग
अपना सहुर ना देख के
दुसरों पर लांछन लगाते हैं लोग
अपने को राम बता के
औरों को रावन बताते हैं लोग
अपनी गलती छुपा के
दुसरों को ग़लत ठहराते हैं लोग
लोगों का क्या लेना है
आज आपके तारीफों के पुल बांधेंगे
तो कल उसी को धुल में मिलाएंगे लोग
आप के मुंह पर बाह-बाही कर 
पिठ के पिछे छुरा घोंपते है लोग
तकलीफ मे आप को देखकर 
हमेशा मुस्कुराएंगे लोग
आपकी भलाई का बोल कर
नुक्सान कराएंगे लोग
आपको गलत राह दिखा के
हमेशा ठहाके लगाएंगे लोग
अब आप ही सोचिए की,
कैसे कैसे होते हैं लोग।

              ----------- ममता चौहान

Comments

Popular posts from this blog

ग़ज़ल -दुष्यंत कुमार

जिंदगी - ममता चौहान, ( स्वरचित )