दृष्टिकोन

          


एक लड़की का जीवन ।



  दृष्टिकोण
    

देखने में कितना आसान लगता है
लेकिन ये आसान नहीं होता है।

एक बच्ची , जो जन्म तो लेती है
अपने मां- पापा के घर
लेकिन अपना सारा जीवन गुजार देती है।
अपने सांस- ससुर के घर

अपनों को भुला कर
वो , रिश्ते नये अपनाती है।
अपनी पसंद- नापसंद बिसराकर
वो उन्हीं के रंग में ढल जाती है।

नादानियां करते- करते 
जिम्मेदार बन जाती है।
खुद से ज्यादा , वो आज कल
 चिंता दुसरों की करती है।

सब कुछ सहकर भी
‘ ठिक हुं ' रेसा कहती हैं।
रोते हुए चेहरे पर
एक झुठी मुस्कुराहट ला देती है।

देखने में जितना आसान लगता है
उतना आसान नहीं होता है।
एक लड़की का जीवन
जैसा दिखता है , वैसा बिल्कुल नहीं होता है।

                                      धन्यवाद........

-------------- ममता चौहान
               ( स्वरचित कविता )

Comments

Popular posts from this blog

ग़ज़ल -दुष्यंत कुमार

जिंदगी - ममता चौहान, ( स्वरचित )

लोग , कविता संग्रह, स्वरचित , ममता चौहान