एक अजनबी
* एक अजनबी *
वो एक अजनबी
आज एक अजनबी है।
कल शायद नहीं रहेगा।
वो मेरा अपना बन जाएगा।
आज में कतराती हूं
उससे बात करने में,
नजरें मिलाने में
वो शायद कल मेरा हमसफ़र बन जाएगा।
मेरी अनकही बातें,
इशारों से ही समझ जाएगा।
मेरे सुख और दुःख में,
हमेशा मेरा साथ निभाएगा।
मेरी हंसी के पिछे,
मेरे ग़म को समझ जाएगा।
मेरी डांट के पिछे,
मेरा प्यार उसे दिख जाएगा।
शायद वो अजनबी
मेरी जिंदगी में भी आएगा।
वो अजनबी नहीं
बल्कि वो मेरा अपना बन जाएगा।
---------- ममता चौहान
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