गुमनाम आशिक , कविता

           

     गुमनाम आशिक

जिंदगी है सुनी सी,
इसमें किसीको आने मत देना।
जो कोई आ गया तो फिर उसे जाने मत देना।
वरना हमेशा यादें आती ही रहेंगी।धुंधली सी!

यादों से क्या होता है?
वो ना रहे तो फिर बातों से क्या होता है।
हमें आप की याद आती है.....
फिर ये बात कहने से क्या होता है?

जब में साथ थी तुम्हारे
तब मुड़कर भी देखा न तुमने
आज जो तुमसे दुर हो गयी
तो अब रोने से क्या होता है?

मेरे ख्यालों में डुबे तुम रहते हो।
न जाने क्या? अपने आप से ही बड़बड़ाते हो?
घमंड था जीस बात पर कल तुम्हें
आज उसी से जिंदगी बिताते हों!

जो जगहा कभी खाली न थी।
आज विरान हो गई है।
जहां किसी का बसेरा था।
आज सुन- सान हो गई है।

सोचा जिंदगी बहुत बड़ी है।
किसी के चले जाने से क्या फर्क पड़ता है?
लेकिन जब जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश की,
तो ऐसा लगा,कि मानों वो ही तो मेरी जिंदगी थी।

               ----------  ममता चौहान
                

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