जिंदगी जीने का मुलमंत्र




जिंदगी जीने का मुलमंत्र

में जिंदगी से डरती हुं
कुछ भी नया करने से कतराती हुं।
सोचती हुं की जो पुराना है , वहीं सही है।
फिर क्यों बदलाव चाहती हुं?

जिना- मरना तो आम बात है
इसमें खुल के जिना , हमारे हाथ है
तनाव तो जिंदगी में सब को है
लेकिन ये भी तो अनिश्चित है।

किसी को दुःख देकर
तुम खुद कभी खुश नहीं रह सकते।
लेकिन अगर दुसरों कि खुशियों में 
अगर अपनी खुशी दिख जाये

तो, तुम खुशनसीब हो
अगर कोई तुम्हें दुःख भी पहुंचाना चाहे
फिर भी तुम दुसरों कि खुशियों में
शरिख होकर हमेशा खुश ही रहोगे। 


----------------- ममता चौहान

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