हकीकत बातें....
हकीकत बातें....
जब आए हैं हम
अपना किरदार निभाने
तो क्यों ना हम
कुछ इस तरहां से निभायें
कि, जीते जी हमें जान सके लोग
और मरने के बाद भी ना बिसरायें।
जिंदगी को करिब से देखो
शक कि निगाहों से , तो मत ही देखों
जिंदगी तो है, बेहते पानी की तरहां
कुडे को किनारा देकर
जिंदगी को साफ पानी कि तरहां
बेहने दो।
ये ऑंखें बहुत फरेबी है
गम में भी रुलाती है
और खुशी में भी रुलाती है
बस्स फर्क इतना है
कि, हम खुशी में सब के सामने रो सकते है
पर दुःख में नहीं।
-------------- ममता चौहान
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