कविता संग्रह

                   दगाबाज

यह कविता में ने उन लोगों को याद करते हुए लिखी है , जो हर किसी को कहते हैं कि , ‘में आपसे प्यार करता हूं।’ 
     अब मैं यह भी नहीं कहुंगी कि सारे लोग झुठे होते हैं। लेकिन सभी लोग सच्चे भी तो नहीं होते। इस लिए मेरा कहना है कि, ( शेर )
                 दिल लगावों किसी से
                भले ही इजहार करना देर से
                 झुठे प्यार के वादे कर
                 दगा ना करना किसी से।


मुल कविता 


              दगाबाज 

उन्होंने मुझसे , अजिब लेहजें में बात की,
मेरा भी मिजाज खराब हो गया
मेने कहा “ माफ़ी मांगों "
वो हम से नाराज़ हो गया।

चला गया जो जिंदगी से
उसका हमें ग़म नहीं
जो बात तुमने की है मुझसे
उस के लिए कोई माफ़ी नहीं।

बस कुछ रिश्ते निभा रही थी
उम्र का लिहाज रख रही थी
आपने तो माशुका समझ लिया
जो नहीं बोलना चाहिए था, वो भी अपने बोल दिया।

घमंड था मुझे इस बात का
की, कोई तो मुझे समझता है
आपने तो साबित ही कर दिया
घमंड किसका टिक पाता है।

छोड़ो जाने दो
अपनी जिंदगी आराम से जियो
‘ रब इसे खुश कर दो
जितनी कामयाबी वो चाहे
उन्हें उतना कामयाब कर दो '
हमेशा खुश रहकर
सब को खुशियां बाट दो।

                         ------------ M. R. Chauhan

Comments

Popular posts from this blog

ग़ज़ल -दुष्यंत कुमार

जिंदगी - ममता चौहान, ( स्वरचित )

लोग , कविता संग्रह, स्वरचित , ममता चौहान