ग़रीबी एक बिमारी

      ग़रीबी एक बिमारी

गरिबी यह एक बिमारी है।
जो लग जाए तो फिर उम्र भर साथ नहीं छोड़ती।

कहां जाता है की हर मर्ज की दवा है।
लेकिन गरिबी ये किस मर्ज की दवा है?

कोई वस्तु खरिदना चाहते हैं लोग,
लेकिन अपनी गरिबी के कारण नहीं ले पाते।

चार लोगों में उसे बेज्जती सहनी पड़ती है।
क्यों की वह गरीब है।

ग़रीबी - अमिरी क्या यह ईश्वरीय भेदभाव है?
अगर नहीं
तो हमें इसे बढ़ावा देने का कोई अधिकार नहीं।

हमें हमारे समाज में से 
“गरीबी” इस अद्भुत शब्द को निकाल फेंक देना चाहिए।

आज गरीब व्यक्ति समाज में मजाक बन कर रेह गया है।
इसलिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 क्यों की वह लोग गरीब नहीं बनना चाहते।
 अपने आप को आर्थिक दृष्टि से कमजोर नहीं बनाना चाहते।

क्यों कि अमिरों को ऐसा लगता है की,
ग़रीबी यह एक भयंकर बिमारी है।

जो एक बार लग जाये, 
तो पुरी जिंदगी साथ नहीं छोड़ती।

अमिरी यह भी एक बहुत बड़ी बिमारी है।
जो लग जाए तो हमें संस्कार नहीं सिखा पाती।

बड़ों का आदर करना,
मान-सम्मान करना सब कुछ भुला दैती है।

         -------- ममता चौहान

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